बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की आदमकद मूर्ति का अनावरण: शिक्षा, समानता और जागरूकता का संदेश— कर्नल राज्यवर्धन राठौड़
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की आदमकद मूर्ति का अनावरण: शिक्षा, समानता और जागरूकता का संदेश— कर्नल राज्यवर्धन राठौड़
Dr. Bhimrao Ambedkar की 135वीं जयंती के अवसर पर Karnsar गाँव में उनकी आदमकद प्रतिमा का भव्य अनावरण समारोह आयोजित किया गया। यह आयोजन सामाजिक न्याय, शिक्षा और समरसता के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का एक सशक्त प्रयास रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री Rajyavardhan Singh Rathore उपस्थित रहे। उन्होंने फीता काटकर प्रतिमा का अनावरण किया और बाबा साहेब के विचारों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
शिक्षा: समाज परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत
अपने संबोधन में राठौड़ ने कहा कि शिक्षा शेरनी के दूध के समान है—जो इसे पीता है, वह शक्तिशाली बनता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि Dr. Bhimrao Ambedkar ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त कर समाज के वंचित वर्गों को अधिकार दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया।
यह आयोजन युवाओं को शिक्षा के महत्व को समझाने और समाज में जागरूकता फैलाने का माध्यम बना।
विकास कार्यों की घोषणाएँ
इस अवसर पर क्षेत्र के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ भी की गईं, जिनमें शामिल हैं:
- अंबेडकर चौक पर हाई मास्क लाइट लगाने की घोषणा
- राजकीय विद्यालय में कृषि विज्ञान संकाय शुरू करने की स्वीकृति
- स्थानीय स्तर पर शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का संकल्प
ये पहल ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और अवसरों को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
शोभायात्रा और जनभागीदारी
कार्यक्रम के दौरान एक भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई, जिसमें महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बाबा साहेब के जयकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।
इस आयोजन में विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखने को मिली, जो सामाजिक एकता का प्रतीक है।
सामाजिक समरसता की ओर एक मजबूत कदम
यह आयोजन केवल एक प्रतिमा अनावरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक समरसता, समानता और जागरूकता का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण अवसर बना।
Kalwad Times में प्रकाशित इस खबर के अनुसार, यह कार्यक्रम समाज को एकजुट करने और बाबा साहेब के विचारों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल है।
निष्कर्ष
Dr. Bhimrao Ambedkar के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। कर्णसर में उनकी आदमकद प्रतिमा का अनावरण न केवल उन्हें श्रद्धांजलि है, बल्कि एक मजबूत और समावेशी समाज के निर्माण का संकल्प भी है।
ऐसे आयोजन यह संदेश देते हैं कि शिक्षा, समानता और जागरूकता ही एक सशक्त भारत की नींव हैं।

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