कर्णसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण: सामाजिक न्याय और शिक्षा के प्रति संकल्प— कर्नल राज्यवर्धन राठौड़
कर्णसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण: सामाजिक न्याय और शिक्षा के प्रति संकल्प— कर्नल राज्यवर्धन राठौड़
Dr. Bhimrao Ambedkar की 133वीं जयंती के अवसर पर Karnsar में उनकी भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि का अवसर था, बल्कि सामाजिक समरसता, शिक्षा और समानता के मूल्यों को पुनः सुदृढ़ करने का संदेश भी देता है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री Rajyavardhan Singh Rathore ने भाग लिया और बाबा साहेब के विचारों को समाज के लिए मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो समाज को आगे बढ़ाने और समान अवसर प्रदान करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।
शिक्षा और सामाजिक समानता पर विशेष जोर
कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त कर समाज के वंचित वर्गों के लिए नई राह बनाई।
इस अवसर पर कर्णसर में स्थित विद्यालय में कृषि विज्ञान संकाय शुरू करने की घोषणा की गई, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर मिलेंगे।
विकास के साथ जुड़ा सामाजिक सम्मान
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। यह आयोजन केवल एक प्रतिमा अनावरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता और सामूहिक एकता का प्रतीक बन गया।
साथ ही, अंबेडकर चौक पर हाई मास्क लाइट लगाने की घोषणा भी की गई, जिससे क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विकास सुनिश्चित होगा।
शोभायात्रा और जनभागीदारी
इस अवसर पर एक भव्य शोभायात्रा भी निकाली गई, जिसमें स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने इसे और अधिक प्रभावशाली बनाया।
बाबा साहेब के विचार: आज भी प्रासंगिक
Dr. Bhimrao Ambedkar के विचार आज भी समाज को दिशा देते हैं। उनका “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” का संदेश आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
निष्कर्ष
कर्णसर में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, शिक्षा और समावेशी विकास की दिशा में एक मजबूत कदम है।
राजस्थान सरकार का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के साथ ही संभव है।
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